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जिसका गुरु कोई नहीं, उसका गुरु शिव

  • Writer: siddharth soni
    siddharth soni
  • Nov 18, 2022
  • 2 min read

कोई भी चीज को सीखने के दौरान गुरु का मार्गदर्शन हो तो उत्तम है । गुरु सीखने की प्रक्रिया को समझा सकता है । प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम कर सकता है । सीखने के दौरान आने वाली रुकावटों से आगाह कर सकता है । और प्रक्रिया के दौरान आपको सुरक्षित रख सकता है । गुरु की पहचान कैसे हो और कुछ सीखने के लिए सही गुरु का चुनाव कैसे करें, इस पर विस्तार से बात करेंगे । फिलहाल इस पोस्ट में ये जानेंगे कि उचित गुरु के ना मिलने पर क्या करें ।


कुछ सीखना शुरू करना हो और उचित गुरु न मिले तो क्या करे ?


सबसे अच्छा होगा कि उचित गुरु मिलने तक रुकने से अच्छा है सीखने की प्रक्रिया को शुरू कर देना । मगर गुरु की उपस्थिति भी जरूरी है । खास कर के शारीरिक और मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित किसी भी तरह के experiment में गुरु का होना बेहद जरूरी है । इसलिए कहा गया है कि गुरु बिना ज्ञान नहीं। खास करके तंत्र शास्त्र को साधने में गुरु का होना अनिवार्य कहा गया है । तंत्र शास्त्र में गुरु की महत्ता पर ब्लॉग लिखा हुआ है, आप चाहें तो पढ़ सकते हैं ।


वैसे हो वेटलिफ्टिंग सीखते समय गुरु न हो तो bad form होने से व्यक्ति चोटिल हो सकता है ।


तो कुछ सीखना शुरू करने से पहले क्या गुरु की खोज की जाए? जी नहीं, काल करे सो आज कर आज करे सो अब ।

सीखने की प्रक्रिया के दौरान गुरु आपको अपने आप मिल जाएगा । इसलिए actual गुरु की जगह virtual गुरु भी चलेगा । ये virtual गुरु है शिव ।


केवल शिव को ही जगद्गुरु की उपाधि से नवाजा गया है । यानी जिसका कोई गुरु नहीं उसका गुरु शिव है । तंत्र शास्त्र के अनुसार शिव में सभी विद्याओं का वास माना जाता है । Indian God of War है कार्तिकेय, यानी कार्तिकेय को सनातन के अनुसार युद्ध का देवता माना जाता है । कार्तिकेय इंद्र की सेना के सेनापति हैं । कार्तिकेय को युद्ध शास्त्र की शिक्षा शिव ने दी ।


इसलिए कुछ सीखना शुरू करने से पहले गुरु का ध्यान, फिर शिव का और फिर गणेश का ध्यान जरूरी है । और यदि आपका कोई physical गुरु नहीं है तो आप शिव को अपना virtual गुरु मानते हुए प्रक्रिया को आरंभ कर सकते हैं । इससे आप सही रास्ते पर रहेंगे ।


पढ़ने के लिए धन्यवाद


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