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हनुमान सी शक्ति चाहिए तो राम को हृदय में रखो

  • Writer: siddharth soni
    siddharth soni
  • Nov 18, 2022
  • 1 min read

"अतुलित बालधामम"

हनुमान को अतुलित बल का धाम कहते हैं । मगर क्या सोचा है कि हनुमान में इतना अतुलित बल आया कैसे ?


हनुमान के इष्ट हैं राम । सीता ने कहा है कि राम ही सत्य हैं । सत्य का दूसरा नाम है राम ।

हनुमान राम के सेवक थे । यानी वो सत्य की सेवा करते थे ।

हनुमान ने राम को हृदय में धारण किया था, जिसे उन्होंने विभीषण के कहने पर सीना चीर कर दिखाया भी था । यानी हनुमान के हृदय में सत्य को धारण करते थे ।


सत्यम शिवम सुंदरम । सत्य ही शिव है, और शिव ही सुंदर है ।

सत्य में परम बल होता है । कहते हैं साँच को आँच नहीं । यानी सत्य को अग्नि परीक्षा का भय नहीं होता ।

इसलिए जो सत्य को हृदय में धारण करेगा वो अपने आपको हनुमान जितना बलवान पाएगा । फिर वो ऐसे काम भी सिद्ध कर देगा जिन्हें जनसाधारण असंभव समझता है ।


एक छलांग में समुद्र लांघ जाना । रावण की लंका में आग लगा देना । जड़ी - बूटी के नाम पर पूरा पहाड़ उठा लाना ।


हृदय में सत्य को धारण करो और अपने आपको हनुमान जैसा बलवान पाओ। सूत्र आसान है । मगर क्या हृदय में सत्य को धारण करना आसान है? अगर सोच सको तो आसान है ।


धन्यवाद 🌷




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